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मेरे अल्फाज़

शौर्य गाथा

Devender Grover

16 कविताएं

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शौर्य गाथा

जल में मैं, थल में मैं और वायु में भी मैं,
पहचान ही कुछ मेरी ऐसी है।

हाँ आईएनएस विराट हूँ मैं, आईएनएस विक्रांत भी,
आईएनएस विक्रमादित्य भी मैं,
आईएनएस सिंधुरत्न भी मैं, आईएनएस सिंधुघोष भी मैं,
आईएनएस केसरी भी मैं और आईएनएस ऐरावत भी मैं,
न जाने कितने नाम मैंने पाएँ हैं,
उतने शौर्य भी मैंने दिखलाये हैं,
जब भी दुश्मन ने अपनी ताकत दिखलाई है,
हमेशा मुँह की तो खाई है।

हाँ अर्जुन हूँ मैं, भीष्म भी मैं हूँ,
कर्ण भी मैं और अजय भी मैं हूँ,
हम सब ने अपने नामों जैसी ही,
धूम मचाई है और पाकिस्तानी,
सेना को घुटनों पर लाकर जमीन चटाई है,
इस विध्वंसक की गाथा मैंने अपने वीरों संग ही गाई है,
शान मेरी इस देश के वीरों से है,
उनहोंने ने ही मेरी आँखें दुश्मन को दिखाई हैं।

हाँ मिग हूँ मैं, मिग 21, मिराज भी में हूँ,
सुखोई भी,तेजस्वी भी मैं और अब राफेल भी मैं,
हम सब ने मिलकर कई युद्धों में,
जब भी अपनी ताकत दिखलाई है,
दुश्मन ने हर बार अपनी पीठ ही दिखलाई है,
सम्मान हूँ मैं भारतीय वायुसेना का,
एक आग का गोला हूँ,
कांपती हैं मेरी गर्जन से सीमाएं दुश्मनों की,
वायु वीरों की हिम्मत से ही पहचान है मेरी,
अब तो उड़ान कुछ अंदाज ही अलग होगा,

क्योंकि,

सुपरसोनिक गति से मैंने नई शक्ति पाई है,
और आधुनिक मिसाइलों ने मेरी ताकत बढ़ाई है,

शौर्य हो तुम सब मेरे भारत देश के,
गर्व है मुझको तुम पर क्योंकि,
मैं भी हूँ सैनिक इस भारत देश का।

- देवेन्द्र ग्रोवर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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