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प्रेम कैसा हो?: करवाचौथ विशेष

                
                                                         
                            स्थिर शक्ति सा हो,
                                                                 
                            
ब्रह्मा सा - जो नया जन्म दे,
शिव सा - जो विष पी कर भी अमृत दे,
विष्णु सा - जो जीवन भर निभाए,
पृथ्वी सा टिके, चंदन सा महके।

चलायमान शक्ति सा हो,
सरस्वती सा - जो दिशा दे,
पार्वती सा - जो मोह-ममता से बांधे,
लक्ष्मी सा - जो सुख-समृद्धि लाए,
जल सा बहे, पानी सा पवित्र करे।

जीवन में दोनों का संतुलन हो,
सिर्फ स्थिर होगा तो जीवन रुकेगा,
सिर्फ चलायमान होगा तो बिखरेगा,
इसी संतुलन का नाम व्रत हो।

अग्नि सा हो, जो दीये सा जले,
बिजली सा नहीं जो पल में बुझे,
वायु सा हो, जो हर साँस में बसे,
आकाश सा हो, जिसका कोई छोर न हो।

बादल नहीं जो बरस कर चला जाए,
बिजली नहीं जो चमक कर डरा जाए।

तन पाँच तत्वों से बना है,
मन एक प्रेम से बंधा है।

प्रेम ऐसा हो, जो व्रत ही नहीं, मन, वाणी और कर्मों से पवित्र लगे,
प्रेम ही परमात्मा का प्रतीक सा लगे।
-देवकी नन्दन
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8 घंटे पहले

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