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भीड़ में तुम कहां हो

                
                                                         
                            भीड़ में तुम कहाँ हो
                                                                 
                            

भीड़ बहुत है यहाँ,
पर इंसान कम हैं,
फॉलोअर्स हज़ारों हैं,
पर दोस्त बहुत कम हैं।

हर कोई दिखावे में जी रहा है,
फिल्टर में मुस्कुरा रहा है,
अंदर से सब खाली हैं,
बस बाहर से सजा रहा है।

मोबाइल हाथ में है सबके,
पर बात करने को वक्त नहीं,
पड़ोसी भूखा सो गया,
ये देखने की आँख नहीं।

डिग्री तो बहुत हैं तुम्हारे पास,
पर हुनर क्या है?
नौकरी नहीं मिल रही कहकर
रोने से क्या होगा,
खुद कुछ बनाना सीखो,
यही तो वक्त है।

किसान कर्ज़ में डूबा है,
जवान नशे में डूबा है,
नेता वादों में डूबा है,
और हम... हम रील में डूबे हैं।

जागो, स्क्रीन से बाहर आओ,
अपने गाँव को देखो, अपने लोगों को देखो,
एक छोटी सी मदद भी
किसी का पूरा जीवन बदल सकती है।
-देव कुमार पटेल
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4 घंटे पहले

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