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वो मुझे पे भरोसा ,जताती नहीं क्यों? उसे,,

                
                                                         
                            उसे याद मेरी, आती नहीं क्यों?
                                                                 
                            
वो ख्वाबों में मुझको, बुलाती नहीं क्यों?
उसे,,,
दिल कराहता है पल पल, एकबार तो मिले वो
वो खयालों में मुझको, सजाती नहीं क्यों?
उसे,,,,
मै वहीं आज भी हूँ ,जहाँ कल खड़ा था
अब उसे मेरी सूरत ,भाती नहीं क्यों?
उसे,,,
निभाने को रस्में ,कसमें भुलादी
उसे वादों की यादें, आती नहीं क्यों?
उसे,,,,
खतूत उनके मेरे दिल में लिखें हैं
एक लफ्ज भी रुह भुलाती नहीं क्यों?
उस,,,,
वो ही एक मेरे हैं, बाकी तो जमाना है
यह बात उनके दिल में, समाती नहीं क्यों ?
उसे,,,
मुझे उस पे यकीं था, है, और रहेगा
वो मुझे पे भरोसा ,जताती नहीं क्यों?
उसे,,
-देवेन्द्र सिंह चौहान 
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एक घंटा पहले

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