देखो-देखो उड़ी पतंग,
आसमान में लड़ी पतंग।
नीली-पीली, काली-लाल,
सब हैं अनूठी, बेमिसाल।
गजब है इनका रंग-रूप,
उड़ती-मचलती छांव-धूप।
पूंछ बांध उड़ जाती दूर,
ढील देना लेकिन जरूर।
उत्सव की है खूब बहार,
मुझे है पतंगों से प्यार।
- मेराज रज़ा
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