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मेरी आख़री यात्रा

                
                                                         
                            चांद जैसी चादर मे लिपटकर
                                                                 
                            
मै सुकूँ के बिस्तर पर लेटा हूँ
बरसो बाद आज मैं सोने जा रहा हूँ
जिससे मिलने के लिए जी इतनी
जिंदगी मै आज उसका(आख़री मंजिल)
होने जा रहा हूँ
और भ्रम था जिसका कि वो है मेरे पास (रिश्ते)
पर वो था भी नही
मै उन्ही के हाथो विदा होने जा रहा हूँ
और बहुत थक गया चलते चलते
अब मै सुकूँ से सोने जा रहा हूँ
 
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2 घंटे पहले

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