आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रामप्यारी गुर्जर- एक मर्दानी

                
                                                         
                            जिसकी बहादुरी ,पराक्रम सब लोगों की जुबानी थी
                                                                 
                            
उत्तर प्रदेश की बेटी, राम प्यारी गुर्जर भी मर्दानी थी
तैमूर ने लूटी दिल्ली , लाखों का नृशंस संहार किया
रियासत के विस्तार में मानवता को शर्मसार किया
गुर्जर क्या त्यागी क्या बाल्मीकि क्या राजपूत क्या
आखिर सब एकजुट हुए केसरिया फिर लहराने को
हरवीर सिंह और रामप्यारी का नेतृत्व चुना सभी ने
भारतभूमि को अत्याचारी तैमूर से मुक्त कराने को
राम प्यारी के नेतृत्व में वीरांगनाएं चालीस हजार थी
युद्ध कला में प्रशिक्षित थी, मर मिटने को तैयार थी
युद्ध व्यूह रचना ऐसी रची, तैमूर सेना में हाहाकार मची
खड़ग म्यान से खींच रही, रणभूमि रक्त से सींच रही
ललकार रही, लहरा रही हवा में खड़ग और भाला
रण चण्डिका बन उतरी थी, भभक उठी थी ज्वाला
भेद कर किला शत्रु का, गिद्ध की भाँति थी झपट रही
यमद्वार तक कोलाहल था, शत्रु की आंख में खटक रही।
खून से सनी ,रामप्यारी की तलवार दिखाई देती थी
चीखती चिल्लाती, हर शत्रु की पुकार सुनाई देती थी
हरवीर सिंह की वीरगति ने जीवित फिर अभिमान किया
तैमूर की पराजय नें हर वीर वीरांगना को सम्मान दिया
उस अदम्य वीर मर्दानी की सबको गाथा गानी चाहिए
उस राम प्यारी की कहानी पूरे विश्व को बतानी चाहिए।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर