कभी कट्टा बाला प्रदेश,
आज सुशासन बाला भेष।
जनता का ऐसा जनादेश,
देश को देती संदेश।
चली कमल और तीर,
लालटेन और पंजा गिर।
जनता है अब शातिर,
हाथों से बनाते तकदीर।
गर्दा उड़ा देला कहा जात,
क्या बदलेगी अब तस्वीर।
- कौशिक अलबेला
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