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अग्निवीर –हर जन्म तेरे नाम

                
                                                         
                            मैंने अपना हर जन्म तेरे नाम कर दिया,
                                                                 
                            
ए मेरे भारत, हर अरमान कर दिया।
तू जहाँ रहे सलामत सदा,
मैंने हर कसम तुझ पर कुर्बान कर दिया।

कारगिल की बर्फीली चोटी पर, जब सांसें जम जाती थीं,
तब हमारी तोपों की ज्वाला, रातों को दिन बना जाती थी।
हर पल गूँज उठा आकाश, धरती भी थर्रा जाती थी,
दुश्मन की हर चाल वहाँ, धुएँ में ढल जाती थी।

बोफोर्स की गर्जन ने, रण का रुख बदल डाला,
ऊँचे शिखरों तक पहुँच कर, शत्रु को कुचल डाला।

इन्फैंट्री आगे बढ़ती थी, हम प्रहार बन साथ रहे,
संग मिलकर ही हर मोर्चे पर, विजय के हालात रहे।

भारत… ओ भारत…
तेरी शान, हमारा अभिमान है।
जब तक अग्नि हमारे संग है,
सुरक्षित हर सीमा, हर प्राण है।
जय जय रण, जय जय बल,
जय जय आर्टिलरी, अमर पहचान है।

सौरभ का साहस याद रहे,
अधिकारी का बलिदान रहे,
वालिया की वीर पुकारों में,
भारत का ही सम्मान रहे।

जैसे कोई खिलौना दिल के पास रहता है,
वैसे माँ का तिरंगा, मेरे साथ रहता है।
हर कदम पर उसकी छाया,
हर धड़कन में विश्वास रहता है।
भारत का वीर सिपाही,
माँ के लिए कुर्बान रहता है।

वर्दी केवल वस्त्र नहीं —
यह राष्ट्र की सांस होती है।
तोपें केवल धातु नहीं —
यह भारत का विश्वास होती है।

मैंने अपना हर जन्म तेरे नाम कर दिया,
हर सांस, हर धड़कन, तेरे नाम कर दिया।
रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी, तुझ पर जीवन अर्पण कर दिया।
 
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5 महीने पहले

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