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यादों का अजीब खेल है.

                
                                                         
                            यादों का भी अजीब खेल है यारों 
                                                                 
                            
कभी खुशी बनकर आती है तो कभी गम,

जब कभी भी आती है लेकिन
फिर से कोई एहसास करा जाती है।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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