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मेरी भाषा हिंदी

                
                                                         
                            हिंदी हिंद अमोल है ,जान सभी लो आज
                                                                 
                            
विश्व पटल पर एक दिन,यही करेगी राज
यही करेगी राज,ताज यह ग्रहण करेगी
दूर नहीं वह दिवस,सभी का वरण करेगी
नारी मस्तक सजे,ज्यों रक्तिम वर्ण बिन्दी
भारत माँ के भाल ,की शोभा बने हिंदी
हिंदी मेरे देश की भाषा हिंदी मुझको प्यारी
मातृ भाषा को नमन सदा ही
यही पहचान हमारी
पहला शब्द "मां "हर बालक
हिंदी में जब बोलेI
अपनी मीठी बोली से वह
अमृत जैसा घोले
ममता प्यार दुलार से पूरित
अपनी हिंदी भाषा
राज भाषाएँ बाईस हैं
पर हिंदी सबकी माता
मन के भाव को सुंदर ढंग से
हिंदी ही कह पाती
सबको ही यह अपना लेती
सबके काम ये आती
हिन्दू , हिंदी, हिंद के वासी
हिंदुस्तान हमारा
मातृ भूमि वीरों की भूमि
यह इतिहास हमारा
जननी जन्म भूमि की गरिमा
भाषा का सम्मान
हर भारत वासी को अपनी
भाषा पर अभिमान"*

नाम-दीपा संजय"*दीप*

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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