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किसान

Kisan
                
                                                         
                            लहलहाते खेतों में बच्चों
                                                                 
                            
मिले मुझे अनेक किसान
मैली धोती सिर पर गमछा
खेतों में बो रहे वह धान
नँगे पावं पेट हैं खाली
पर सबसे रहते अंजान
माथे से वह रहा पसीना
फूंक रहे मिट्टी में जान
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
कठिन धूप आंधी पानी भी
रोक सके ना उनके काम
सूखें खेत नयन तब बरसें
नमन नभ को करें अविराम
दारुण दशा देख दिल रोया
पास ना कौड़ी ना ही दाम
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
टूटे छप्पर कच्चे घर हैं
हुये कर्ज से लहूलुहान
गिरवीं पड़ा घर गहना सब
जीते जी तन्हा परेशान
आत्मदाह किया विवश हो
पीछे सब छोड़ी सन्तान
कैसी विडम्बना विधि की यह हम फिर भी कहते देश महान
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
मैली धोती सिर पर गमछा
खेतों में बो रहे वह धान

- दीपा संजय

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8 वर्ष पहले

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