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Kisan

मेरे अल्फाज़

किसान

Deepa Gupta

34 कविताएं

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लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
मैली धोती सिर पर गमछा
खेतों में बो रहे वह धान
नँगे पावं पेट हैं खाली
पर सबसे रहते अंजान
माथे से वह रहा पसीना
फूंक रहे मिट्टी में जान
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
कठिन धूप आंधी पानी भी
रोक सके ना उनके काम
सूखें खेत नयन तब बरसें
नमन नभ को करें अविराम
दारुण दशा देख दिल रोया
पास ना कौड़ी ना ही दाम
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
टूटे छप्पर कच्चे घर हैं
हुये कर्ज से लहूलुहान
गिरवीं पड़ा घर गहना सब
जीते जी तन्हा परेशान
आत्मदाह किया विवश हो
पीछे सब छोड़ी सन्तान
कैसी विडम्बना विधि की यह हम फिर भी कहते देश महान
लहलहाते खेतों में बच्चों
मिले मुझे अनेक किसान
मैली धोती सिर पर गमछा
खेतों में बो रहे वह धान

- दीपा संजय

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