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ये लबों से खिलना गुफ़्तगू, लाजवाब तेरी गुफ़्तगू।

                
                                                         
                            ये लबों से खिलना गुफ़्तगू,
                                                                 
                            
लाजवाब तेरी गुफ़्तगू।

उड़ती फ़िज़ाओं को समेटे,
बेख़याल तेरी जुस्तजू।

दिल के सूने वीराने में,
गूँजती है हू-ब-हू।

रात की पेशानी पर जैसे
चाँद लिखे कोई आरज़ू,।

ये लबों से खिलना गुफ़्तगू,
लाजवाब तेरी गुफ़्तगू।

उड़ती फ़िज़ाओं को समेटे,
बेख़याल तेरी जुस्तजू।

इश्क़ ने जब भी उतारा
दिल की मिट्टी पर क़लम।

हर हरफ़ में ढल गई बस
बस एक तेरी जुस्तजू।

लबों से खिलना गुफ़्तगू,
लाजवाब तेरी गुफ़्तगू।

उड़ती फ़िज़ाओं को समेटे,
बेख़याल तेरी जुस्तजू।
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42 मिनट पहले

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