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आँगन की रौनक, घर का श्रृंगार हैं बेटियाँ

                
                                                         
                            आँगन की रौनक, घर का श्रृंगार हैं बेटियाँ,
                                                                 
                            
ममता भरे दिलों का मधुर प्यार हैं बेटियाँ।
पापा के नैनों का उजला सा ख़्वाब हैं,
माँ के लिए दुलार ही दुलार हैं बेटियाँ।
जिस घर में मुस्कुराएँ तो महके समूचा घर,
सूने हुए चमन की नई बहार हैं बेटियाँ।
दुःख की घड़ी में बनती हैं हिम्मत की रोशनी,
टूटे हुए दिलों का सदा आधार हैं बेटियाँ।
खुद दर्द को छुपाकर जो हँसती हैं हर घड़ी,
रिश्तों के बीच प्रेम की झंकार हैं बेटियाँ।
इनको न बोझ समझना, न समझो पराया धन,
जीवन के हर सफ़र का उपहार हैं बेटियाँ।
पंखों को इनके काटना अच्छा नहीं कभी,
अपने ही आसमान की हक़दार हैं बेटियाँ।
सम्मान दीजिए इन्हें, अधिकार दीजिए,
ईश्वर की दी हुई अनुपम बहार हैं बेटियाँ।
जिस घर में बेटियों की हँसी गूँजती रहे,
उस घर की हर खुशी का आधार हैं बेटियाँ।
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एक घंटा पहले

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