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अधूरी जिंदगी-पुरानी डायरी से

                
                                                         
                            ये जिंदगी अधूरी है ये शाम अभी अधूरी है।
                                                                 
                            
कितने सागर पीये ये प्यास अभी अधूरी है।।

फुर्सत मिले तो आ जाना कभी जिंदगी में।
मुहब्बत की वो दास्तान अभी अधूरी है।।

ये मंजिले वो मंजिल ना जाने कितनी मंजिल।
पर दूर वो आखिरी मंजिल अभी अधूरी है।।

हाथ की इन रेखाओं में जाने कहां हो तुम।
क्या कहें हम अपनी किस्मत अभी अधूरी है।।

आपको क्या बतलाये हम ये हालाते दिल।
अधूरे जख्मों की वो दास्तान अभी अधूरी है।।

गुजारिश इतनी कि आ जाओ कभी ख्यालों मे।
ख्वाबों की वो गुमनाम तस्वीर अभी अधूरी है।।
           - बृज मोहन सिंह बिष्ट
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39 मिनट पहले

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