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टूटता बिखरता हुआ मैं

                
                                                         
                            टूटता बिखरता हुआ मैं बस
                                                                 
                            
अपनी राह चलता जा रहा
ना ख़ुशी और ना ही ग़म
अब ना रास कुछ भी आ रहा
अपना चेहरा आइने में
अनजाना सा अब दिखता है
अक्स अपना ही अब
पहचान में ना आ रहा
जिस सफ़र पे निकला था
ख़ुद की तलाश में
उस सफ़र में ही मैं
ख़ुद को गंवाता जा रहा
टूटता बिखरता हुआ...।
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4 घंटे पहले

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