निकली थी ज़िंदगी कहीं
कोई मुक़ाम ढूँढने
थोड़ी हँसी थोड़ी ख़ुशी
थोड़ा सा नाम ढूँढने
निकली थी...।
कुछ रास्ते कुछ मंज़िलें
कुछ सुबह-ओ-शाम ढूँढने
निकली थी...।
थोड़ी मुश्किलें थोड़ी उलझनें
थोड़ा आराम ढूँढने
निकली थी...।
पर ये जो वक़्त था
थोड़ा सख़्त था
कुछ चीज़ें मिलीं
कई रह गईं
बाक़ी बचे इस वक़्त में
वही चीज़ें तमाम ढूँढने
निकली है...।
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