सर्द हवाएं
है हिम तिरोहित
गिरी धवल
मन वैरागी
पथिक अनजाना
खुद का खोज
महल छोड़
सिद्धार्थ बना त्यागी
बुद्ध तलाश
भर्मित मन
योशोधरा की प्रीत
राहुल प्रेम
बांध न सका
प्रीत रज बंधन
माया का जाल
वैराग्य घेरा
मन के कोने कोने
सुख त्यागा
निर्मोही बन
पथिक सत्य खोज
अंतर्मन में
जीवन मंत्र
प्राप्त हो गया बुद्ध
ज्ञान की गंगा
संघ शरण्
जगत में गुंजित
बुधम शरण्।।
बी कुमार स्वरचित
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