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उत्तम  करना  'गया पिंडदान'

                
                                                         
                            देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च,
                                                                 
                            
नम: स्वहाये स्वधायै नित्यमेव नमोनम:।""

आज पितृपक्ष का प्रथम दिन
पित्तर याद मे    रहे   लवलीन
मान्यता दुनिया     में ये इत्तर
इस पखवाड़े आते गृह पित्तर।

आश्विन के अमावस्या आते
निज लोक पितर लौट जाते
वंशजों से पाकर श्रद्धा दान
जरिये,तर्पण और पिण्डदान ।

हिन्दू धर्म की परंपराये अभिन्न
रखता , शुद्ध कर्मो में    लीन
निज आचरण  करते निगरानी
पशु-पक्षियों को देते दाना –पानी ॥

उत्तम  करना  'गया पिंडदान'
बद्रीनाथ पिंड अर्पण मोक्षपान
सौभाग्यशाली   पाते ये मौका
पितृ दोष निवृत्त जीवन नौका।।

करे निज दोषोंं का अर्पण
पितृ-स्वप्न    हेतु  समर्पण
आगत-विगत सपनो की धुरी
पितृ ऋण- विमुक्त जरूरी।

बिछुडो को रखें   सभी याद
इसलिए बना वार्षिक मियाद
वृद्ध परिजनों  की सेवा अगाध
सच्ची श्रद्धांजली श्रेष्ठतम श्राद्ध ॥
-विजय बहादुर तिवारी 
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एक घंटा पहले

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