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चाय की चुस्की एक बहाना है

                
                                                         
                            चाय की चुस्की एक बहाना है,
                                                                 
                            
लम्हा सुकून का पाना है।।

मनःस्थिति-परिस्थिति का असंतुलन,
तनाव को करता है उत्पन्न।
मन भावनाओं में जागे द्वंद्व,
कार्य-क्षमता पड़ती मंद।।

मौजूद चाय में एल-थियेनिन,
चिंता-अशांति करती क्षीण।
बढ़ता हैप्पी हार्मोन सेरोटोनिन,
मन मुदित बनाती डोपामिन।।

गर तरंग-ए-तरन्नुम पाना है,
चाय की चुस्की एक बहाना है...

बनाने हेतु समूह मतैक्य,
विश्व-प्रसिद्ध है यह पेय।
लाती करीब, दे साझा मंच,
वार्ताओं की मान्य सरपंच।।

सहज, सुलभ और सस्ती,
हर चर्चा के मध्य हस्ती।
मेहमाननवाज़ी या इंतज़ार,
चाय सार्वभौमिक इज़हार।।

स्वागत-पेय जाना-पहचाना है,
चाय की चुस्की एक बहाना है...

प्याली और लबों की दूरी,
हो सकती अपूर्ण-अधूरी।
चाय नहीं बस एक स्वाद,
यह रिश्तों का जीवंत संवाद।।

जल्दबाज़ी में सड़क वाली,
सर्द रातों में कड़क वाली।
शाम ज़रूरत, सुबह आदत,
चाय जीवन की नफ़ासत।।

चुप्पी और चहक का पैमाना है,
चाय की चुस्की एक बहाना है..
-विजय बहादुर तिवारी
 
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एक घंटा पहले

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