पेड़ हमारे सच्चे साथी हैं,
हर जीवन में प्रार्थी हैं।
सृष्टि के हर कण-कण,
हर क्षण-क्षण में ही
तो इसका स्वरूप है।
धरती की खुशहाली,
धरती की हरियाली,
जीवन की जान,
वातावरण की पहचान।
का आधार ही तो पेड़ हैं।
कुछ मूर्खों, अभिमानी, लालची, स्वार्थी
लोगों ने किया जीवन का आधार का विनाश।
आहार नहीं तो प्राण नहीं,
प्राण नहीं तो आधार नहीं।
यही तो एक जीवन का अंश का आधार हैं।
पेड़ों को ना काटो, ना विनाश करो।
इस जीवन का नया प्रवाह करो।
उनको भी हर जीव की तरह
जीने का अधिकार है।
हर दुःख इन सुख में, यदि पेड़ नहीं,
देते हमारा साथ।
जीने का आधार नहीं।
हमें भी उनके प्राणों
की रक्षा करनी चाहिए।
कलियुग के इस भीषण प्रकोप
से बचने का आधार ही यही हैं।
अपनी नई पीढ़ी और नए जीवन के बारे में जरा सोचो।
पेड़ हमारे सच्चे साथी हैं,
हर जीवन में प्रार्थी हैं।
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