तारीख़ गवाह होती है,
जो दिलेर हो, नाम भी उसी का होता है।
दल बदलने वालों की नहीं होती पूछ,
लोग समझते हैं उन्हें तुच्छ।
वो समझता है, जनसंख्या बड़ी तो जीत पक्की,
ये चुनाव नहीं, दोस्त, जीवन है—बात है सच्ची।
न खोज तू जुगत लगाने की विधि,
यही ब्रह्मांड की है सच्ची रीति।
कब तक धोखा देता रहेगा ख़ुद को?
पहचान अपने रगों में बहते ख़ून को।
टिका दे नज़रें मंज़िल पर,
लगा दे दौड़ अपने बूते पर।
-भुनेश्वर अनंत
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