पहला-पहला प्यार हुआ,
पहली बार नज़रें मिलीं।
कैसे बताऊँ दोस्त,
मेरे दिल में कमल की पंखुड़ियाँ खिलीं।
झील-सी आँखें, नरम-नरम होंठ,
देख मेरा मन, कहाँ देख ले ज़रा तेरी लुगाई को।
अब तो होगा जल्द मिलन,
देर न होगी तेरी सगाई को।
दिल में बजी शहनाई,
थोड़ी देर में मुझे होश आई।
जब उसने मुझे एक थप्पड़ ज़ोर से लगाई,
बोली—क्यों कभी देखी नहीं औरत पराई?
गाल मलता मैं देखता रहा,
रात भर उसके ख़यालों में जागता रहा।
ये मेरा दिल क्यों लुट गया,
यही गीत रात भर गाता रहा।
- भुनेश्वर अनंत
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