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जब तुम आओगे

                
                                                         
                            जब तुम आओगे, में लाऊंगी बचा कर तुम्हारे हिस्से का सारा वक्त जो मैने बिताया तुम्हे सोच कर।
                                                                 
                            
जब तुम आओगे, में लाऊंगी साथ कई सारे ख्वाब जो मैने देखे कभी बंद आंखों से तो कभी खुली आंखों से ।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी ढेर सारी शिकायतें जो खुद से की हैं मैने तुम्हारे बिना ।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी कई सारी ख्वाहिशें जो मैने अधूरी रखी तुम्हारे इंतजार में ।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी बहुत सारे आंसू जो तुम्हे याद करके भी सामने नहीं आए।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी कई सारी राते जो मैने तुम्हारी चाह में चांद को देख कर बीता दी।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी ढेर सारा सम्मान जो शब्दों में नहीं आंखों से बयां होगा ।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी ढेर सारे तोहफे जो संभाले है मैने हर खास दिन पर तुम्हारे लिए।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी ढेर सारे व्रत जिनमें मन्नत होगी सिर्फ तुम्हारे लिए ।
जब तुम आओगे, में लाऊंगी अनंत प्रेम जो तुमसे था तुमसे है और तुमसे ही होगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 महीने पहले

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