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मुंतज़िर आँखें हसीं...

                
                                                         
                            मुंतज़िर आँखें हसीं अरमान होती जाएँगी।
                                                                 
                            
आरज़ू भी एक दिन तूफ़ान होती जाएगी।

हर क़दम पर ज़िंदगी इम्तिहाँ लेती रहे,
तजरबों से राह भी आसान होती जाएगी।

दर्द जब हद से बढ़ेगा मुस्कुरा देंगे वहीं,
मुश्किलें ही राह का सामान होती जाएँगी।

बे-रुख़ी बढ़ती रही तो फ़ासले बढ़ जाएँगे,
दिल की दुनिया फिर बहुत वीरान होती जाएगी।

हम चिराग़ों को हवा से डर नहीं लगता कोई,
शब हमारी लौ से भी ताबान होती जाएगी।

आसमाँ छूने की ख़्वाहिश कम न होगी उम्र भर,
हर नई मंज़िल नई उड़ान होती जाएगी।

- अज़हर साबरी
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5 घंटे पहले

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