निर्दयी बहुत जमाना है।
साथ किस तरह निभाना है।।
दूर तक भूमि दिखी बंजर-
वहां पर गांँव बसाना है।
आदमी मिला मुझे सहसा -
किंतु निकला बेगाना है।
जहांँ तक एक महल देखा-
चुनांचे बहुत पुराना है।
मुझे क्यों उसने भटकाया-
समय पर उसे छकाना है।
जरा सी बूंँदा-बांँदी में-
भेक का है टर्राना है।
बया को खेतों में देखा-
प्यार से चुगती दाना है।
-अविनाश ब्यौहार
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