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सुख का बोध

                
                                                         
                            सुख का बोध
                                                                 
                            
हे जग तूने खूब दिये हैं

निज अनुभव सुखी बनाने के

किस तरंग से, किस वृत्ति से

या आता सुख मयखाने से।

क्या राह मिले की

दौलत है सुख?

क्या सूखी रोटी मेहनत की है सुख?

क्या जीवन साँसों में मिलता सुख है?

या कल्पनाओं का साकार हो जाना सुख है?

सूरज की अदभुत सुन्दरता

जग को आलोकित करती है

उस आभा में जो मिल जाये स्वार्णिम

क्या वह सुख का परिचय रहती है?

जब नीड़ो को पंछी साँझ ढ़ले,

चहकते वापिस आते है।

भिनसारे की चहचहाहट भी

क्या सुख का बोध कराती है।

तृण चरने ग्वालों की गाय सभी

गौशाला से जब सुबह निकलती है

अपने आँचल में भर ममता का दूध

साँझ बछड़े को पिलाने दौड़ी आती है।

बछड़ा पीवे निज ममता से गौमाता दूध लुटाती है

क्या ग्वाले का दूध दोहन,उसे सुख का बोध कराता है

किस स्वरूप में मिलता है, जाने किसको कितना सुख?

कुछ अनुभव भी तुम बतलाओ मित्रों

कैसे? और क्या-क्या? से मिला है तुमको सुख।

क्यों दुनिया में लोग सभी, सुख के दीवाने हो गये

प्यार जताना, सुख को पाना, हर दिल के फसाने हो गये।

क्यों हरदम अपने बाहुपाश में कसकर

वह सुख का आलिंगन करना सीख गये

क्यों सीख लिया हाथों ने सबके

पाना सुख का कोमल स्पर्श यहाँ

क्यों नजरें भी सब ललचायी है

अपने में समाये सुख की मूरत यहाँ

ओठों की थिरकन प्रेमभरी

क्यों सुख का आभास कराती है

हृदय की धड़कन चाहत में

प्रेमी के मिलने पर सुख पा जाती है

''पीव'' सुख का प्यासा मैं चातक हूँ

सुख ने मेरे दिन-रैन है लूटे

रात गये की रून-झुन मुझको

इन भावों को बतलावे झूठे

देखा नहीं है मैंने सुख को

मैं सुख से अंजान हूँ

रात गये तारों की झिलमिल

हो सकता है सुख का अल्पनाम हो

कही मिले सुख तो परिचय करना

पीव मिल जाना आत्माराम से

मैंने नाम सुना है अब तक तेरा

सुख अतिथि बन कभी मरे घर आना आराम से

मेरे अन्तस में जो पीड़ा जागे

वह मिलना चाहे जगतार से

यदि स्वभाव मेरा प्रकट हुआ तो

सुख बरसेगा जीवन में अंबर से ।
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7 वर्ष पहले

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