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मुझे याद आता है मेरा बचपन सुहाना

                
                                                         
                            मुझे याद आती है, बचपन की बातें
                                                                 
                            
चुरा ली समय ने, वे सभी अनमोल सौगाते।
छुआ छुआउअल का खेल,ऑगन में मस्ताना
ढूंडा ढुडउअल में ढूंडे, सब अंधेरे में छिप जाना
दुका दुकउअल में झगडना,हल्ला गुल्ला मचाना।
खेल अंडा डावली कंची का, लगता सबको सुहाना।
मुझे याद आती है, बचपन की बातें;;;; ; ; ;
छम छम बरसात में गुप्पी लंगडी खेलना
सोलह गोटी, चंगा में, सबको सकेलना
पीव रेत के तो कभी मिटटी के, घरघुला बनाना
खो खो कबडडी ओर, ,कुश्ती में ताकत दिखाना।
मुझे याद आती है बचपन की बातें
चुरा ली समय ने, वे सभी अनमोल सौगातें।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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