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प्रियतम आन मिलो फिर...

Priytam
                
                                                         
                            मेरी ब्रज भाषा में लिखी कविता की कुछ पंकतिया...
                                                                 
                            
. . . . . . . . . . "प्रियतमा"

प्रियतम आन मिलो फिर,
मोहे ज़मुना तीर.!

एहि विरह की बेला फिर,
मोहे लागि रही अति भीर!

व्याह हुआ मोरा अनय संग फिर,
नाय रुकत मोरे नीर!

रुपक नाहि सुहात फिर,
मोहे बेंदी देवत पीर!

मृतक समान करिहों फिर,
मोरा नटखट एैसो अहीर!

प्रियतम आन मिलो फिर,
मोहे ज़मुना तीर!

. . . . . . . . . . . . . . आशीष........................

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8 वर्ष पहले

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