तू मुझसे रूठ जाएगी जमाना छोड़ दूँगा मै,
तुझे कल से ही पगली अब सताना छोड़ दूँगा मै,
तू गर रूठी रहेगी अब सदा अपने दीवाने से,
अगर ठंडी पड़ेगी अब नहाना छोड़ दूँगा मै।
जो भी सुनता था अब तक लगा गीत है,
कल की बातें भी मुझको लगी प्रीत है,
चाहता था तुझे डेरे पर मै सदा,
तू मेरी जीत है कि हनीप्रीत है।
वैलंटाइंस डे पर...
कुछ बोल के तुम लगता पगली सरमाय गयी हो हमसे अब,
ना मिलन कभी होगा सुनकर भरमाय गयी हो हमसे अब,
लाठी तो तुमसे ज्यादा मिली हमको बजरंगदल वालों से,
सब न्यूज हमारा देख रहे तुम छाय गयी हो हमसे अब।
मैंने आज पुलवामा हमले पर चार पंक्तियाँ कहता हूँ हास्य कवि क्या कहता.....
अपने जवानों का ये शव नहीं हमको तो उन आतंकियों की जान हमे चाहिए,
कसम है भारती की एक-एक को उड़ाओ भारत का अब स्वाभिमान हमे चाहिए,
कुत्तों को दिखा दो औकात शेरों की ही अब जान के ही बदले में जान हमे चाहिए,
कश्मीर छोडो हमे उसकी जरूरत नहीं साथ उसके पूरा पाकिस्तान हमे चाहिए।
माता जी बुलाती रही बहेना ने कह दिया रक्षाबंधन में भैया आना नहीं भूलना,
सुबह शाम दो्पहर तीनों समय खाना और यादों में हमारे फर्ज़ना नहीं भूलना,
पीछे से किया है वार सुअर का सरदार उसको तो फाड़ के दिखाना नहीं भूलना,
हमे चाहे भूल जाओ फांसी मे या झूल जाओ इस बार पाक को उड़ाना नहीं भूलना।
आशीष कविगुरु
WhatsApp no :-
8052624737जय हिंद, जय भारत, जय भारतीय
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