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कुछ नहीं कुछ भी नहीं

                
                                                         
                            कुछ नहीं कुछ भी नहीं मेरे
                                                                 
                            
दिल में अब ऐ ज़िंदगी।
जो मिला उसका शुक्रिया जो
ना मिला है ग़म नहीं।।
किसी से कुछ रंजिश नहीं चाहे
अपने है या पराये थे।
किसी से कुछ अनबन नहीं किसी
बात का अब मन नहीं।।
क्या ग़ैर थे क्या अपने थे रंग
सबने तो दिखला दिये।
शिकवा नहीं किसी से हमें मन में
कोई उलझन नहीं।।
सुलझा रही हूं ख़ुद को मैं कि
संभाल लूं हर मोड़ पर।
तुझसे नज़र मैं मिला सकूं
होंठों पर हो कंपन नहीं।।
अंतर्मन में रखे हुए भाव को
देख ले कोई और भी।
ऐसा कोई शीशा नहीं ऐसा
कोई दर्पण नहीं।।
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एक घंटा पहले

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