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प्रियतम से,उनकी निश्चलता,करुणा से।

                
                                                         
                            पूर्णता ?
                                                                 
                            
क्या है पूर्णता?
घट का भर जाना,
या घट घट व्यापी से,
एकाकार हो जाना।

पूर्णता?
क्या है पूर्णता?
नदिया का सागर से मिलन,
या बूंद बूंद का बादल से,
एकाकार हो जाना।

पूर्णता?
क्या है पूर्णता?
बादल का बरसना,
या बादल की बूंद बूंद का धरा से,
एकाकार हो जाना।

पूर्णता?
क्या है पूर्णता?
स्वयं की इच्छाओं को पूर्ण करना,
या जन कल्याण हेतु,निश्चल प्रेम में,
एकाकार हो जाना।

पूर्णता?
वह पूर्ण मिलन ही है,
जहां जन जन में नारायण दिख जाए,
और कण कण से निश्चल प्रेम ,करुणा उभर आए,
फिर जीवन का हर पल आराधना
और जीवन बन जाता है साधना,
साकार होती है पूर्णता,
कान्हा को कण कण में देख,
संपूर्ण हो जाती है हर आराधना।
यही है योग,
प्रियतम से,उनकी निश्चलता,करुणा से।
-अरुणिमा बहादुर खरे ' वैदेही '
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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