नई सुबह, नई उमंग
जागो प्यारे, किरणें आईं,
नया सवेरा संदेश लाईं।
छोड़ो आलस, आँखें खोलो,
मीठे स्वर में अब कुछ बोलो।
फूल खिले हैं डाली-डाली,
खुशियों से भर गई हर खाली।
तितली बैठी कलियों पर,
सुख बरसाता अंबर-सा नीर।
देखो पंछी करने निकले,
अपने सपनों के पथ पर पग धरके।
तू भी उठकर दृढ़निश्चय कर,
अपने जीवन को सुंदर कर।
बीता जो पल, वह वापस ना आएगा,
सुनहरा अवसर हाथ से निकल जाएगा।
उठो वीर, "अभय"अब राह बनाओ,
अपने सपनों को सच कर जाओ।
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