ओ माँ ,
मैं तेरा अनमोल रतन हूँ ,
तेरी आँखों का मैं दर्पण हूँ ,
मुझसे ही है तेरी दुनिया ,
तुझसे ही मेरा वतन है ,
क्या मांगू मैं खुदा से मन्नत ,
तेरे क़दमों में है मेरा जन्नत ,
गर्व से ऊँचा सदा तेरा माथ रहे ,
मेरे सिर में सदा तेरा हाथ रहे ,
न झुकेगी तेरी आँखें,
कभी मेरे कर्मों से ,
न होऊंगा कभी बिमुख ,
सदा मैं अपने धर्मों से ,
मरकर भी तेरा ऋण ,
कभी चुका न पाऊंगा ,
जब भी मिले ये जीवन,
तेरी शरण ही आऊंगा,
तू है,
तो ये जीवन आधार है ,
वर्ना सबकुछ निराधार है।
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