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ओ माँ

                
                                                         
                            ओ माँ ,
                                                                 
                            

मैं तेरा अनमोल रतन हूँ ,

तेरी आँखों का मैं दर्पण हूँ ,

मुझसे ही है तेरी दुनिया ,

तुझसे ही मेरा वतन है ,

क्या मांगू मैं खुदा से मन्नत ,

तेरे क़दमों में है मेरा जन्नत ,

गर्व से ऊँचा सदा तेरा माथ रहे ,

मेरे सिर में सदा तेरा हाथ रहे ,

न झुकेगी तेरी आँखें,

कभी मेरे कर्मों से ,

न होऊंगा कभी बिमुख ,

सदा मैं अपने धर्मों से ,

मरकर भी तेरा ऋण ,

कभी चुका न पाऊंगा ,

जब भी मिले ये जीवन,

तेरी शरण ही आऊंगा,

तू है,

तो ये जीवन आधार है ,

वर्ना सबकुछ निराधार है।



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6 वर्ष पहले

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