ज़िन्दगी भी कैसे चलती है
कभी भागती है कभी दौड़ती है ,
कभी बिखरती है, कभी संवरती है
कभी इशारों पर नचाती है, कभी अपनी धुन पर नाचती है ,
गिराती है ,उठाती है,उठा कर फिर गिराती है,
ये ज़िन्दगी भी कैसे चलती है,
कही मीठी फुहार है, कहीं दुखों की बयार है,
कही रोंधती है आशाओ को कभी जगाती है अभिलाषाओं को ,
कही प्रेम है कही क्रोध है,
कही हजारों का प्रतिशोध है
कही रुदाली है कही देवदासी है,
कही भरी है हुई है भावों से, कहीं लब्जो की प्यासी है,
कही मिलन का राग है कही विरह की उदासी है
ये ज़िन्दगी भी कैसे चलती है
अनुराग यादव अंशु
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