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बिजली सी गिर गई मुझ पर

                
                                                         
                            बिजली सी गिर गई मुझ पर जब
                                                                 
                            
मैंने रिश्तों को तार तार होते देखा
एक वेबस लाचार मां को दो
वक्त की रोटी के लिए दर बदर
भटकते देखा
सब कुछ होते हुए भी यूं तन्हा
बसर करते देखा
दौलत के लिए भाई को भाई से
झगड़ते देखा
दुश्मन बन एक दूसरे को नोंचते
देखा l
घर का बंटवारा होते देखा
अपनों से अपनों का अलगाव देखा l
चेहरे पर मासूमियत और दिलों मैं
बैर का भाव देखा
एक हरी भरी बगिया को जब
उजड़ते देखा l

Anuradha vinay udainiya
Datia Madhya Pradesh
 
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4 वर्ष पहले

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