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जीवन का हिसाब

                
                                                         
                            किस-किस की बातें तूने ग़ौर से सुनीं?
                                                                 
                            
उन बातों का तुझ पर असर कैसा रहा?
फिर किस ओर मुड़ा तू, किधर को गया?
उस राह में तूने भला क्या ही किया?

यह भी तो सुना कि तेरी कितनों से बनी?
और कितनों से तेरी बात बिगड़ी रही?
बस इतना सा जीवन, ये छोटी सी उम्र,
बस इतना सा ही काम तूने इसमें किया?

क्या फ़ायदा हुआ इस भाग-दौड़ का तुझे?
क्या मोल मिला इस रंग-ओ-बू की शाम का?
बस इतने ही सवालों में खत्म हो गई,
वह कहानी जिसे तूने सँवारकर जिया था।
-अनु राजपूत
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6 महीने पहले

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