ज़िंदगी का मक़सद था आपको उम्र-भर हमसे महरूम रखकर,
हमें पल-पल अंगारों पर बिना आग के तड़पाना...
हमें तो फूल भी तब नसीब हुए,
जब उनकी क़ब्र पर फूलों की बारिश हो रही थी...
अब फूल और अंगार, दोनों का मुक़ाम एक हो गया,
और हम अपने ही मुक़ाम से महरूम हो गए...
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