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देखा किये हैं जबसे हम उनको क़रीब से

                
                                                         
                            देखा किये हैं जबसे हम उनको क़रीब से
                                                                 
                            
आने लगे नज़र हैं क्यों वो कुछ अजीब से

अब किस तरह से आज तुझे जाने दें सनम
हमको मिले हो जान यहां तुम नसीब से

इस शहर में तू सच ज़रा बचकर के बोलना
लटका न दें ये लोग तुम्हें फिर सलीब से

लहजा बदल के उसने भी जब बात की सनम
होने लगा है प्यार फिर अपने रक़ीब से

नाराज़गी लिए जो तुम आये हो मिलने को
मिलता है कौन इस तरह अपने हबीब से।
-अनमोल
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एक घंटा पहले

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