हाँ तो समझदार है हम बहुत
वर्तमान तो हमसे काँपता है
औऱ भविष्य हमसे इठलाता है
रहा अतीत तो वो मुँह छुपाता है
इस वक्त के मॉर्डन उलटफेर में
हाथों की उंगलियों में फंसी वो सिगरेट
और उसका धुंआ,गुटखे का स्वाद औऱ
शराब का मादक अहसास बड़ा ही
सुहाता है,उत्तेजना से भरपूर उसका वो
ताक़तमय अहसास अदम्य ही
आकर्षित करता,बनाता वो
इंसान को अविरल,अविराम....!
हाय वो सिगरेट का धुँआ वो उसके
छल्ले औऱ उन धुंए के छल्लों में
लिपटा भविष्य और उस भविष्य में
लिपटा वर्तमान और वर्तमान से काँपता
अतीत और अतीत की सवारी का वो ज़हर
जो एक नई मंजिल की तरफ बढ़ाता क़दम
जिनमे वो सिगरेट का धुँआ औऱ उसी धुँए
में ज़िंदगी देती नया आयाम उस स्वाभिमानी
कैंसर को,कांपती देह,चीख़ती सांसे,घुटते
एहसास औऱ फिर अन्ततःरूह को विराम
हाय वो सिगरेट का धुँआ,धुँए में जिंदगी।।
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