यदि मैं बादल होता
सोच समझकर बरसता
यदि मैं बादल होता
गरीबों पर दया करता
किसानों पर दया करता
बच्चों संग मैं हंसता
बुढ़ों को मैं तंग न करता
कर्मचारियों को मैं तंग न करता
कवियों के संग मैं हंसता
बच्चों के संग मैं खेलता
बड़ों के संग बैठता
यदि मैं बादल होता।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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