मैं हूं ज्ञान का प्यासा
मैं हूं ध्यान का प्यासा
मैं हूं नाम का प्यासा
रख कर विश्व विजय की आशा
रख कर दिग्विजय की आशा
लगातार तेज चल रहा हूं मैं
जीत के लिए मचल रहा हूं मैं
चाहिए नहीं धन अपार
चाहिए मुझे स्वदेश प्यार
चाहिए मुझे विश्व प्यार
चाहिए मुझे जन जन का प्यार
और कुछ नहीं
और कुछ नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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