मेरे मन के विचार
हैं जलते अंगार
जला दूं सारा संसार
या बचा दूं संसार
दिखा दूं स्वदेश प्यार
बचा लूं हैं जो ईमानदार
जला दूं घृणा का संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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