बह रही स्वदेश प्यार की पावन पवन
स्वदेश प्यार से भरा है वन उपवन
स्वदेश प्यार से भरा है नील गगन
बह रही साहस व वीरता की पवन
स्वदेश प्यार के गौरव गान गा रहे जन जन
स्वदेश प्यार के गीत गा रहे नदी,रेत,निर्जन
स्वदेश प्यार में मगन हैं मेरा मन।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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