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सखी! सावन आया

                
                                                         
                            सखी! सावन आया
                                                                 
                            
ऋतु मनभावन आया
स्वर्ग उतर कर धरा पर आया
हिंद का गौरव गान गाया
मेघ छाए नील गगन में
बरसा बरसी चारु चमन में
मेंढक टर्रटराए
मयूर नाच दिखाए
काले काले बादल आए
भूरे भूरे बादल आए
बिजली चमकी
बादल गरजा
बढ़ी शोभा गगन की
मन हरषा
तन हरषा
नील गगन
में मन मगन
मन मेरा मुस्काए
तन मेरा मुस्काए
तन तेरा मुस्काए
सारा जग हर्षाया
सखी! सावन आया।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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