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सहज कुमार और वाराणसी

                
                                                         
                            जहां बहती गंगा की निर्मल धारा
                                                                 
                            
है वह बनारस शहर हमारा प्यारा
जहां लोग बोलते हैं भोजपुरी
है जो शिव की पावन नगरी
काशी जिसका पुराना नाम
सारे संसार में है जिसका नाम
ऋग्वेद,स्कंद पुराण में है जिसका नाम
रामायण, महाभारत में है जिसका नाम
बुद्ध भगवान पहले आए जहां बांटने ज्ञान
जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर का है जो जन्म स्थान
वरूण और असी
मिल कर बना वाराणसी
आक्रमणकारियों ने जिसके काशी नाथ मंदिर को तोड़ा
जिसको रानी अहिल्याबाई ने आकर पुनः जोड़ा
शिक्षा,कला, साहित्य,ज्ञान की है जो राजधानी
ह्वेनसांग ने जिसकी कही कहानी
तुलसी,कबीर, रविदास, भारतेंदु की कर्म स्थली
प्रेमचंद,राम चंद्र शुक्ल,हजारी जी की कर्म स्थली
धूमिल और नामवर सिंह की है जो कर्म स्थली
जहां का एम.पी., पी.एम. है
जहां से कितने एस.पी.और डी. एम. हैं
है वही शहर वाराणसी जहां मैं गया हजार बार
जहां अनुराग पढ़ा
और आगे बढ़ा
उस शहर को कैसे मैं भूलूं?
बलिया के बगल में है वह जिसे मैं जब चाहूं छू लूं
काशी हिंदू विश्वविद्यालय है जहां
एनी बेसेंट और मालवीय जी को जाने जहां
जहां से निकला माटी का लाल
जिसने १९६५ में पाक को हरा कर किया कमाल
है वह प्यारी नगरी
जिसे जाने जहान सारी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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