हृदय जीतना सीखो, प्यार करना सीखो
सीख गए तो इसे इजहार करना सीखो
बोलो,कैसे करोगे प्यार?
करके कर्म सेवा के हजार
मीठा मीठा बोल के करो प्यार
शब्दों को तोल के करो प्यार
स्वदेश से करो प्यार
सारे संसार से करो प्यार
कर्मठता से करो प्यार
सक्रियता से करो प्यार
चोरी को करो इंकार
पर चोर से करो प्यार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X