नहीं पढ़ोगे लिखोगे
तो ईंटागारा ढोओगे
और क्या करोगे?
इधर उधर भटकोगे
यदि पढ़ोगे लिखोगे
अधिकारी बनोगे
आज्ञाकारी बनोगे
समझदार बनोगे
इज्जतदार बनोगे
अच्छे कपड़े पहनोगे
अच्छे घरों में रहोगे
अच्छा खाओगे,पिओगे
अच्छे लोगों के संग रहोगे
खूब पढ़ो लिखो
नित नूतन कुछ सीखो
सफल सदा दिखो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X