जब जब मैं लिखना चाहता हूं प्यार
मुझसे लिखा जाता है " स्वदेश प्यार"
जब जब मैं कमाना चाहता हूं धन अपार
तब तब याद आता है सेवा संस्कार
तप त्याग वैराग्य सदाचार उपकार
लगता है सारा संसार
मेरा एक बड़ा परिवार
पर पहले है स्वदेश प्यार
स्वदेश प्यार, मातृभूमि से प्यार
जन्म भूमि से प्यार
कर्म भूमि से प्यार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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